महिलाओं / बच्चों के लिए अधिकार

बच्चों के अधिकार

देश में बाल अधिकारों के लिए सख्त कानून बने हुए हैं, बावजूद इसके देश के बच्चों का जीवन आज भी अंधकारमय है। देश में लाखों बच्चे गरीबी और अशिक्षा से भरा जीवन जीने को मजबूर हैं। गरीबी के कारण बच्चों से मजदूरी कराई जाती है। बाल अपराधों की सर्वाधिक शिकार लड़कियां होती हैं। बच्चों का नारकीय जीवन केवल शहरों में ही देखने को नहीं मिलेगा, बल्कि गांवों में भी स्थिति खराब ही है। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में ये बच्चे कुरीतियों और कुप्रथाओं का शिकार आज भी हो रहे हैं। राज्य में शारदा एक्ट लागू है, फिर भी बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं में कमी नहीं आई है। देश में सर्वाधिक बाल विवाह राजस्थान में ही होने का रिकॉर्ड है।

राजस्थान में 40 फीसदी लड़कियों की शादी बालिग उम्र से पहले ही कर दी जाती है। दूसरी ओर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3, 2005 की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में 57.1 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले ही कर दी गई। राजस्थान ही एक ऐसा राज्य है, जहां बाल विवाह सर्वाधिक होते हैं। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों का रिकॉर्ड बताता है कि यहां 65.7 प्रतिशत तक बाल विवाह होते हैं। सेंसस 2001 के अनुसार तीन लाख लड़कियां अपनी उम्र के 15वें वर्ष से पहले ही एक बच्चे की मां बन जाती हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर वर्ष एक लाख से अधिक महिलाओं की मृत्यु गर्भावस्था और बच्चों को जन्म देने के दौरान हो जाती है। हर सात मिनट में गर्भावस्था की जटिलताओं के कारण एक महिला की मृत्यु होती है। बाल विवाह न सिर्फ बच्चियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का एक तरीका है बल्कि इसकी वजह से वे शिक्षा से भी वंचित रह जाती हैं, जबकि शिक्षा प्राप्त करना अब अधिकार बन चुका है। शिक्षा का अभाव ही बाल विवाह जैसी परंपरा को अनवरत बनाए रखे हुए है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की स्थापना 5 मार्च 2007 को हुई थी। इसकी स्थापना राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 के तहत बच्चों को दिए गए अधिकारों जैसे समानता, 6 से 14 साल की उम्र तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा, बाल मज़दूरी पर रोक आदि की निगरानी के लिए हुई थी। पर क्या देश में बाल अधिकारों का संरक्षण हो पा रहा है? क्या वास्तव में देश का हर बच्चा शिक्षा पा रहा है? इन सभी सवालों के जवाब तलाश करना और वास्तविकता उजागर करना लाडो संस्था का मकसद है।