Daughters are Precious Fest
Daughters Are Precious
World Record India for Largest Save the Girl Child Educational Awareness Drive at 773 #Institutions sensitized 158220 #People by 800 DAP RAKSHAKS all over Rajasthan under the keen leadership of Mission Director National Health Mission Naveen Jain IAS. On 17th November, 2017, Laado was one of the part of this Historical Moment for the World. Laado is carrying the mission “Daughters are Precious”.
Signature Campaign

22 अगस्त को मुंबई में महिला फोटो जर्नलिस्ट के साथ हुए दुष्कर्म ने एक बार फिर देश को झकझोर कर रख दिया। दिल्ली सहित देश के अन्य हिस्सों में महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार एवं दुष्कर्म के घावों को ताजा कर दिया। इस तरह के निंदनीय अपराधों को रोकने के लिए अब हमें सिर्फ देश की सरकारों एवं राजनीतिज्ञों के भरोसे नहीं रह कर समाज को भी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्वयं को आगे आना होगा। ऐसे अपराध समाज में न हों इसके लिए समाज को जागरुकता, प्रचार-प्रसार, समझाइश और महिलाओं को स्वयं सुरक्षा के उपाय के बारे में प्रशिक्षण देना होगा। इसके लिए देश में कई सामाजिक संगठनों को आगे आना होगा और आम जनता को अपने परिवार व परिवार की महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार और सामाजिक संस्थाओं को सहयोग प्रदान करना होगा। इन्हीं विचारों को आगे बढ़ाने के लिए इमेजिन फोटो जर्नलिस्ट सोसायटी और लाडो सोसायटी ने 31 अगस्त, 2013 को जयपुर के आईसीजी गल्र्स कॉलेज में हस्ताक्षर अभियान चला कर जनचेतना जाग्रत करने का प्रयास किया। इस के जरिए सरकार तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश की जाएगी कि मुंबई कांड के अपराधियों को कठोरतम सजा देकर देश के सामने एक मिसाल पेश की जाए, जिससे भविष्य में इस तरह के अपराध न हों। इसके लिए अपराधियों में भय व्याप्त हो। देश में महिलाओं को फिर से सुरक्षित जीवन जीने का एहसास हो सके। इस मौके पर बनीपार्क गुलाब उद्यान कराटे क्लब के तकनीकी कराटे कोच सनशाइन दिनेश डाबी ने इमेजिन फोटो जर्नलिस्ट सोसायटी और लाडो सोसायटी से वादा किया कि वे महिलाओं को स्वयं सुरक्षित रहने के लिए जूडो-कराटे के निशुल्क शिविर आयोजित करने के लिए हमेशा दोनों संस्थाओं के साथ रहेंगे। हस्ताक्षर अभियान के दौरान छात्राओं ने देश में लचर कानून व्यवस्था को लेकर रोष व्यक्त किया और अपने हस्ताक्षरों के साथ सभी ने अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने की पेशकश की और नारी के प्रति सम्मान की दृष्टि रखने की सभी से अपील की। हस्ताक्षर अभियान का संदेश दोनों संस्थाओं के सचिव अभिषेक दिवाकर और अश्विनी शर्मा की ओर से मुंबई पुलिस कमिशनर और राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री को भेजा जाएगा।

Seminar on ‘BAAL VIDHWA’ (Child Widow)

बाल विधवाओं के उत्थान के लिए आगे आई लाडो जयपुर। लाडो संस्था द्वारा रविवार को आयोजित सेमिनार ‘न होंगे बाल विवाह तो, न होगी कोई बाल विधवा’ विषय के दौरान लाडो संस्था के प्रयास से आयुष पार्क उद्योग द्वारा भीलवाड़ा जिले के पंडेर गांव की 11 वर्षीय बाल विधवा सुमन को शिक्षा के लिए कार्यक्रम के दौरान वर्ष भर की शिक्षा खर्च के लिए राशि प्रदान की गई। संस्था द्वारा सुमन को उच्च शिक्षा एवं रोजगार प्राप्त होने तक हर तरीके से सहयोग करने का वादा किया गया। सेमिनार के दौरान आयुष पार्क उद्योग, वीणा कैसेट्स और धरम सज्जन ट्रस्ट द्वारा पूर्ण आश्वासन दिया गया कि लाडो संस्था द्वारा आने वाली बाल विधवाओं को हर संभव शिक्षा, प्रशिक्षण, स्वरोजगार के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही यदि समाज सहयोग करता है तो उनके पुनविर्वाह के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। फॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित सेेेेमिनार में राज्य महिला आयोग अध्यक्ष लाड कुमारी जैन ने कहा कि नन्हीं बच्चियों को चिडिय़ों की तरह चहकने दो। उन्हें सामाजिक कुरीतियों, कुप्रथाओं के बंधन में जकड़ कर उनका विकास मत रोको। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक ऐसा अभिशाप है जो हमारे समाज के सदियों से विद्यमान है और इसका एक बड़ा कारण आर्थिक असुरक्षा की भावना भी है। गरीबी और परिस्थितियों से परेशान ग्रामीण लोग अपनी बेटियों की कथित सुरक्षा के भाव से उन्हें विवाह के बंधन में जकड़ देते हैं। नाता, आंटा-सांटा जैसी प्राचीन प्रथाओं का मकसद पहले भले ही सही रहा हो, लेकिन इसका वर्तमान स्वरूप भयावह हो गया है। सेमिनार में प्रख्यात लेखिका और जयपुर इंटेक चैप्टर की संयोजक धर्मेन्द्र कंवर ने लोगों से बाल विवाह जैसी कुरीतियों को दूर करने के लिए सामूहिक और धरातलीय प्रयास करने का आह्वान किया। सेमिनार का शुभारम्भ बालविधवाओं के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री (वृत्त चित्र) से किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद दवाओं के उद्यमी मुकेश अग्रवाल ने लाडो की ब्रांड एम्बेसडर व 11 वर्षीय बाल विधवा सुमन को शिक्षा के लिए अग्रिम खर्च के रूप में चेक प्रदान किया। सेमिनार में सहायक निदेशक जनसंपर्क, जयपुर गोविंद पारिक ने वैश्विक और भारत के आंकड़ों के माध्यम से इस भयावह तस्वीर की सच्चाई बताई और इसे दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। उदयपुर विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्रोफेसर श्री राकुमार व्यास ने कहा कि हमें गांवों की वास्तविक स्थित और उसकी समस्या को समझने की आवश्यकता है। इसके लिए विज्ञापन और फिल्म की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कई उदाहरण के माध्यम से इसे समझाया। रीको में फाइनेंस एडवाइजर श्रीमती अपर्णा सहाय ने कहा कि महिलाओं से जुड़ी इस समस्या के लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा। महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना बहुत जरूरी है। लीला दिवाकर ने बाल विवाह रोकने के लिए मृत्युभोज के खात्मे पर बल दिया। इसके अलावा वीणा कैसेट्स के मालिक श्री हेमजीत मालू, धरम सज्जन ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग समूह के डायरेक्टर श्री अजय चोपड़ा, श्री रोहित परिहार आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संस्था की अध्यक्ष प्रीति जोशी ने बताया कि संस्था का प्रथम उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी बच्चियों व महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में जमीनी स्तर पर प्रयास करना है। कुरीतियों और कुप्रथाओं में जकड़ी महिलाओं को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे का प्रयास यह संस्था करेगी। संस्था के सचिव अश्विन शर्मा ने बताया कि संस्था इन सबके साथ समाज से अंधविश्वास और कुरीतियों के खात्मे, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास के साथ शिक्षण प्रणाली में सुधार के लिए भी अनवरत रूप से प्रयास करेगी। आभार प्रदर्शन लाडो सोसायटी के संरक्षक पुरुषोत्तम दिवाकर ने, संचालन संजय पारीक ने किया।

Help Child Widows for their better future

बाल विवाह ने जन्म दिया बाल विधवाओं को दुनिया और घर-गृहस्थी की समझ आने की उम्र में कोई नारी विधवा होती है तो सामाजिक रूढि़वादिता उसकी जीवन शैली ही बदल देती है। उस पर अनेक पाबंदियां लगा दी जाती हैं। एक तरह से उससे जीवन जीने का हक छीन लिया जाता है। पर जब विधवा बनने के लिए छोटी सी एक बच्ची को मजबूर किया जाए तो क्या समाज की यह कू्ररता नहीं कही जाएगी? जिस बच्ची में किसी तरह की समझ नहीं होती, उसे सिर्फ खेलना, हंसना-खिलखिलाना भाता हो, मां की गोद की वह आदी हो और पिता के दुलार को ही सबकुछ समझती हो, उसी मासूम को विधवा का चोला पहना दिया जाए, तो समाज के इस अन्याय की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। इस कल्पना को साकार रूप से देखना हम जैसे सभ्य लोगों के बूते की बात नहीं है। उस पर भी विडंबना यह कि इन बाल विधवाओं का पुनर्विवाह नहीं किया जाता, बल्कि इन्हें किसी भी उम्र के विधुर पुरुष या विवाहित एकल पुरुष के साथ नाता रख दिया जाता है। नाता रखने के बाद भी इनके जीवन में कोई सुधार नहीं आता बल्कि ये सब उन पुरुषों की पूर्व पत्नियों के बच्चों का लालन-पालन करते हुए अपनी जिंदगी का बोझ ही ढो रही होती हैं। गरीबी से उपजी पुरातन परंपराओं ने बाल विवाहों का प्रचलन बढ़ाया और बाल विवाहों ने बड़े पैमाने पर बाल विधवाओं को जन्म दिया है। रेगिस्तानी प्रदेश के गांवों में हजारों विधवाएं बदकिस्मती का बोझ कंधे पर उठाए अनाम-सी जिंदगी जी रही हैं|

क्या करेगी लाडो सोसायटी?

लाडो सोसायटी ने अखबारों और न्यूज मैगजीन में आने वाली महिलाओं की समस्याओं से संबंधित खबरों पर ध्यान दिया। पिछले कई वर्षों से लाडो सोसायटी इस तरह की खबरों का संकलन कर रही है। प्रदेश का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां महिलाएं त्रस्त नहीं हों। हर क्षेत्र विशेष में अलग-अलग तरह की समस्याएं, कुरीतियां और कुप्रथाएं हैं। और विचार करने की बात यह है कि अधिकतर समस्याएं महिलाओं और बच्चों से ही ताल्लुक रखती हैं। प्रदेश भर में बिखरी महिलाओं और बच्चों की समस्याओं के बारे में जानकारी देने में इंडिया टुडे मैगजीन ने लाडो को बहुत सहयोग किया है। इसी में पढ़कर लाडो सोसायटी ने महिलाओं की सभी समस्याओं को दूर करने का बीड़ा उठाया है। इसी क्रम में लाडो सोसायटी ने सबसे पहले बाल विधवाओं की समस्या को उजागर करने का प्रयास किया है और बच्चियों को बाल विधवा होने से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस संकल्प का नाम दिया गया है – न होंगे बाल विवाह, न होगी कोई बाल विधवा। इस मिशन को पूरा करने के लिए लाडो सोसायटी का प्रयास अनवरत जारी रहेगा।

बाल विधवाओं का मसला इससे पहले संभवतः किसी ने नहीं उठाया और न ही बाल विधवाओं की स्थितियों को सुधारने की पहल की गई है। लाडो ही एकमात्र ऐसी गैर सरकारी संस्था है, जिसने पहली बार राज्य की बाल विधवाओं की करूण गाथा को सबके सामने प्रदर्शित किया है। जो बच्चियां बाल विधवा होने का दंश झेल रही हैं, उन्हें शिक्षित करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लाडो प्रतिबद्ध है। इसके लिए लाडो सोसायटी ने सर्वप्रथम अजमेर और भीलवाड़ा जिलों को चुना है, जहां यह संस्था काम करेगी। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए लाडो ने अपने इस संकल्प की ब्रांड एंबेसडर सुमन तैली को चुना है। सुमन की पूरी पढ़ाई होने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने तक का खर्च लाडो उठाएगी। सुमन को गोद लेकर लाडो ने अपने संकल्प की शुरुआत की है। इसके अतिरिक्त यदि सुमन का परिवार नाता प्रथा जैसी कुप्रथा को बंद करवाने के पक्ष में लाडो का सहयोग करेगा तो लाडो की ओर से सुमन का पुनर्विवाह धूमधाम से कराया जाएगा। लाडो की यह भी कोशिश रहेगी कि राजस्थान के ग्रामीण समाज से नाता प्रथा जैसी कुप्रथा पर भी कानूनी तौर पर पाबंदी लग जाए। इसके अलावा लाडो सोसायटी पूरे राजस्थान प्रदेश के हर जिले में बाल विधवाओं की वास्तविक संख्या और उनकी स्थितियों पर सर्वे करेगी और राजस्थान सरकार के सामने प्रस्तुत करेगी।

बाल विधवाओं की मदद के लिए इस राज्य और देश के प्रबुदृध नागरिकों से मदद का अनुरोध है। तन, मन और धन किसी भी प्रकर से आप संस्था की मदद कर सकते हैं।

LAADO Powered BrijRasiya Program to promote Folk Artists

LAADO Powered BrijRasiya Program to promote Folk Artists of Karauli, Rajasthan.

Laado Powered Photography Workshop

In Jawahar Kala Kendra, from 23rd Jan to 1st February 2015 Pinkcity Art Culture Literature Festival organised by HillView Group. On 31st January, 2015 a Photography Workshop was organised, which was powered by LAADO.