Seminar on ‘BAAL VIDHWA’ (Child Widow)

बाल विधवाओं के उत्थान के लिए आगे आई लाडो जयपुर। लाडो संस्था द्वारा रविवार को आयोजित सेमिनार ‘न होंगे बाल विवाह तो, न होगी कोई बाल विधवा’ विषय के दौरान लाडो संस्था के प्रयास से आयुष पार्क उद्योग द्वारा भीलवाड़ा जिले के पंडेर गांव की 11 वर्षीय बाल विधवा सुमन को शिक्षा के लिए कार्यक्रम के दौरान वर्ष भर की शिक्षा खर्च के लिए राशि प्रदान की गई। संस्था द्वारा सुमन को उच्च शिक्षा एवं रोजगार प्राप्त होने तक हर तरीके से सहयोग करने का वादा किया गया। सेमिनार के दौरान आयुष पार्क उद्योग, वीणा कैसेट्स और धरम सज्जन ट्रस्ट द्वारा पूर्ण आश्वासन दिया गया कि लाडो संस्था द्वारा आने वाली बाल विधवाओं को हर संभव शिक्षा, प्रशिक्षण, स्वरोजगार के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही यदि समाज सहयोग करता है तो उनके पुनविर्वाह के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। फॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित सेेेेमिनार में राज्य महिला आयोग अध्यक्ष लाड कुमारी जैन ने कहा कि नन्हीं बच्चियों को चिडिय़ों की तरह चहकने दो। उन्हें सामाजिक कुरीतियों, कुप्रथाओं के बंधन में जकड़ कर उनका विकास मत रोको। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक ऐसा अभिशाप है जो हमारे समाज के सदियों से विद्यमान है और इसका एक बड़ा कारण आर्थिक असुरक्षा की भावना भी है। गरीबी और परिस्थितियों से परेशान ग्रामीण लोग अपनी बेटियों की कथित सुरक्षा के भाव से उन्हें विवाह के बंधन में जकड़ देते हैं। नाता, आंटा-सांटा जैसी प्राचीन प्रथाओं का मकसद पहले भले ही सही रहा हो, लेकिन इसका वर्तमान स्वरूप भयावह हो गया है। सेमिनार में प्रख्यात लेखिका और जयपुर इंटेक चैप्टर की संयोजक धर्मेन्द्र कंवर ने लोगों से बाल विवाह जैसी कुरीतियों को दूर करने के लिए सामूहिक और धरातलीय प्रयास करने का आह्वान किया। सेमिनार का शुभारम्भ बालविधवाओं के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री (वृत्त चित्र) से किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद दवाओं के उद्यमी मुकेश अग्रवाल ने लाडो की ब्रांड एम्बेसडर व 11 वर्षीय बाल विधवा सुमन को शिक्षा के लिए अग्रिम खर्च के रूप में चेक प्रदान किया। सेमिनार में सहायक निदेशक जनसंपर्क, जयपुर गोविंद पारिक ने वैश्विक और भारत के आंकड़ों के माध्यम से इस भयावह तस्वीर की सच्चाई बताई और इसे दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। उदयपुर विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्रोफेसर श्री राकुमार व्यास ने कहा कि हमें गांवों की वास्तविक स्थित और उसकी समस्या को समझने की आवश्यकता है। इसके लिए विज्ञापन और फिल्म की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कई उदाहरण के माध्यम से इसे समझाया। रीको में फाइनेंस एडवाइजर श्रीमती अपर्णा सहाय ने कहा कि महिलाओं से जुड़ी इस समस्या के लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा। महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना बहुत जरूरी है। लीला दिवाकर ने बाल विवाह रोकने के लिए मृत्युभोज के खात्मे पर बल दिया। इसके अलावा वीणा कैसेट्स के मालिक श्री हेमजीत मालू, धरम सज्जन ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग समूह के डायरेक्टर श्री अजय चोपड़ा, श्री रोहित परिहार आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संस्था की अध्यक्ष प्रीति जोशी ने बताया कि संस्था का प्रथम उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी बच्चियों व महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में जमीनी स्तर पर प्रयास करना है। कुरीतियों और कुप्रथाओं में जकड़ी महिलाओं को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे का प्रयास यह संस्था करेगी। संस्था के सचिव अश्विन शर्मा ने बताया कि संस्था इन सबके साथ समाज से अंधविश्वास और कुरीतियों के खात्मे, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास के साथ शिक्षण प्रणाली में सुधार के लिए भी अनवरत रूप से प्रयास करेगी। आभार प्रदर्शन लाडो सोसायटी के संरक्षक पुरुषोत्तम दिवाकर ने, संचालन संजय पारीक ने किया।

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